क्राइमराज्य
Trending

इलाहाबाद हाईकोर्ट का विवादित बयान: ‘प्राइवेट पार्ट पकड़ना, नाड़ा तोड़ना रेप नहीं’

भाजपा सांसद रेखा शर्मा का कठोर तंज, सवाल: अगर जज ही संवेदनशील नहीं, तो महिलाएं और बच्चियां क्या करेंगी?

— तराई क्रांति समाचार ब्यूरो

यूपी के कासगंज की 11 साल की बच्ची के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर भारी प्रतिक्रिया आ रही है। विवादास्पद बयान में यह कहा गया कि “प्राइवेट पार्ट पकड़ना, नाड़ा तोड़ना रेप नहीं”, जिससे नाराज होकर भाजपा की राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कड़ी टिप्पणी की। शर्मा का कहना है कि अगर न्यायपालिका में जज संवेदनशील नहीं होंगे, तो समाज की सबसे कमजोर – महिलाएं और बच्चियां – किस सुरक्षा पर भरोसा करेंगी? उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान न केवल न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं, बल्कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में भी आसानी पैदा कर सकते हैं। इस विवादास्पद फैसले से जुड़े न्यायिक दृष्टिकोण और संवेदनशीलता की कमी पर अब व्यापक चर्चा और जांच की मांग उठी है।

मामले की पृष्ठभूमि

  • मामला: यूपी के कासगंज में 11 साल की बच्ची के खिलाफ हुए बलात्कार के केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक बयान विवाद का कारण बना।

  • फैसला और बयान: कोर्ट के एक फैसले में यह कहा गया कि “प्राइवेट पार्ट पकड़ना, नाड़ा तोड़ना रेप नहीं” – यह बयान न्यायिक संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है।

  • प्रतिक्रिया: इस बयान पर भाजपा की राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कड़ी टिपण्णी करते हुए कहा, “अगर जज ही संवेदनशील नहीं, तो महिलाएं और बच्चियां क्या करेंगी?”

  • न्यायिक दृष्टिकोण: कोर्ट के इस बयान का तात्पर्य यह था कि किसी मामले में शारीरिक क्रियाओं के कानूनी परिप्रेक्ष्य में अंतर हो सकता है, जिससे यह स्पष्ट नहीं होता कि अपराध की गंभीरता कितनी है। हालांकि, इस बयान को आम जनता और कई सामाजिक संगठनों ने निंदनीय कहा और न्यायिक प्रणाली की संवेदनशीलता पर प्रश्न उठाए।

घटना का पूरा विवरण

  1. घटना का स्वरूप:

    • कासगंज के इस केस में 11 साल की बच्ची के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय में सुनवाई की गई।

  2. इलाहाबाद हाईकोर्ट का बयान:

    • सुनवाई के दौरान कोर्ट के एक न्यायाधीश ने विवादित बयान दिया, जिसके अनुसार “प्राइवेट पार्ट पकड़ना, नाड़ा तोड़ना रेप नहीं”।

    • यह बयान व्याख्या में इस बात को लेकर था कि जब तक कानूनी परिभाषा के तहत पूरी तरह से अपराध सिद्ध न हो, कुछ शारीरिक क्रियाओं को अलग से न तोड़ा जाए।

  3. राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया:

    • इस बयान से नाराज होकर भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने प्रश्न उठाया कि अगर न्यायपालिका के उच्चतम स्तर पर बैठे जज संवेदनशील नहीं हैं, तो महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित कैसे रहेंगी।

    • रेखा शर्मा ने इस बयान को समाज में महिलाओं के खिलाफ अपराध की अनदेखी के रूप में देखा और न्याय व्यवस्था से अधिक संवेदनशीलता की मांग की।

    • कई महिला अधिकार समूह और समाज के अन्य वर्गों ने भी इस बयान पर कड़ा विरोध जताया, यह कहते हुए कि ऐसे बयान अपराध को हल्का करके दिखाते हैं और पीड़ितों के प्रति असंवेदनशीलता को बढ़ावा देते हैं।

  4. आगे की कार्रवाई और जांच:

    • इस विवादास्पद बयान के बाद मामले की फिर से समीक्षा की मांग उठी है।

    • सामाजिक दबाव और राजनैतिक प्रतिक्रिया के बीच न्यायपालिका से स्पष्टता की अपेक्षा की जा रही है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और पीड़ितों के प्रति सहानुभूति सुनिश्चित की जाए।

    • निष्कर्ष

यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका में संवेदनशीलता, अपराध की परिभाषा और पीड़ितों के अधिकारों की गहरी चर्चा का हिस्सा बन चुका है। भाजपा सांसद रेखा शर्मा का तंज इस बात को रेखांकित करता है कि न्यायिक फैसलों में यदि महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई तो समाज में अपराध के खिलाफ सख्त कदम उठाने में भी कमी रह जाएगी। यह मामला आगे जांच और सुनवाई का विषय बना हुआ है, जिससे भविष्य में न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button