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UPI का ‘पुल ट्रांजैक्शन’ बंद करने की तैयारी: साइबर फ्रॉड रुकेगा या बढ़ेगी दिक्कत? जानें एक्सपर्ट की राय

NPCI पेमेंट फ्रॉड रोकने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी में

— तराई क्रांति समाचार ब्यूरो

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को और सुरक्षित बनाने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) नए बदलाव करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, NPCI UPI के ‘पुल ट्रांजैक्शन’ फीचर को बंद करने पर विचार कर रहा है। NPCI बैंकों से इस फैसले पर बातचीत कर रहा है, जिससे साइबर फ्रॉड की घटनाओं में कमी आ सकती है।

इस रिपोर्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि UPI का ‘पुल ट्रांजैक्शन’ क्या होता है, इसे बंद करने की क्या वजह है और इसका ग्राहकों व व्यापारियों पर क्या असर पड़ेगा।


क्या होता है UPI का ‘पुल ट्रांजैक्शन’?

UPI में दो प्रकार से ट्रांजैक्शन किया जाता है –

  1. पुश ट्रांजैक्शन: जब कोई ग्राहक खुद QR कोड स्कैन करके या मोबाइल नंबर डालकर पैसे भेजता है, तो इसे पुश ट्रांजैक्शन कहा जाता है। इसमें ग्राहक पेमेंट की राशि खुद दर्ज करता है।

  2. पुल ट्रांजैक्शन: जब कोई मर्चेंट (दुकान, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या सर्विस प्रोवाइडर) ग्राहक को पेमेंट रिक्वेस्ट भेजता है और ग्राहक केवल UPI पिन डालकर भुगतान करता है, तो इसे ‘पुल ट्रांजैक्शन’ कहा जाता है। इसमें भुगतान की राशि पहले से तय होती है।

ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट, बिजली बिल, मोबाइल रिचार्ज और OTT प्लेटफॉर्म जैसी कई सेवाओं के लिए पुल ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल किया जाता है।


NPCI क्यों बंद करना चाहता है पुल ट्रांजैक्शन?

NPCI साइबर फ्रॉड रोकने के लिए लगातार UPI के सिक्योरिटी फीचर्स को मजबूत कर रहा है। पुल ट्रांजैक्शन फीचर में कई बार ग्राहक गलती से या धोखे में पेमेंट अप्रूव कर देते हैं, जिससे फ्रॉड के मामले बढ़ते हैं। इसे बंद करने से निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं:

फ्रॉड के मामले कम होंगे: साइबर अपराधी कई बार फेक पेमेंट रिक्वेस्ट भेजकर लोगों के बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं। पुल ट्रांजैक्शन हटने से यह खतरा कम होगा।

ग्राहकों का ज्यादा नियंत्रण: ग्राहक खुद मैन्युअल तरीके से पेमेंट करेंगे, जिससे गलती से पैसे कटने की संभावना कम हो जाएगी।

बिना अनुमति पैसे कटने की समस्या खत्म: कई बार ग्राहकों को यह भी नहीं पता होता कि उनके अकाउंट से पैसे कट रहे हैं। इस बदलाव से उन्हें हर पेमेंट को खुद अप्रूव करना होगा।

हालांकि, NPCI इस बदलाव को लागू करने से पहले बैंकों और मर्चेंट कंपनियों से बातचीत कर रहा है।


क्या मर्चेंट्स को होगी परेशानी?

साइबर एक्सपर्ट ईशान सिन्हा के मुताबिक, कई मर्चेंट पुल ट्रांजैक्शन के जरिए मेंबरशिप चार्ज, EMI और मंथली सर्विस चार्ज ऑटो-डेबिट करते हैं। अगर यह फीचर बंद होता है, तो:

❌ मर्चेंट को हर बार ग्राहक से पेमेंट अप्रूवल लेना होगा।
❌ उन्हें मैन्युअली रिमाइंडर भेजने होंगे।
❌ ग्राहकों के लिए भी बार-बार अप्रूवल देना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

इससे कुछ व्यापारियों के लिए पेमेंट सिस्टम प्रभावित हो सकता है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से यह बदलाव जरूरी माना जा रहा है।


क्या NPCI कोई नया विकल्प लाएगा?

NPCI पुल ट्रांजैक्शन को बंद करने के बाद एक नया फीचर ला सकता है, जिससे ऑटो-डेबिट सुरक्षित तरीके से संभव हो सके। कुछ संभावित विकल्प ये हो सकते हैं:

🔹 e-KYC सेतु सिस्टम: आधार-बेस्ड e-KYC ऑथेंटिकेशन से ग्राहकों की पहचान पहले से वेरिफाई होगी।
🔹 UPI AutoPay का अपडेटेड वर्जन: जिसमें हर ऑटो-डेबिट ट्रांजैक्शन से पहले ग्राहक को SMS अलर्ट मिलेगा।
🔹 बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन: जहां बड़ी राशि के ट्रांजैक्शन के लिए फेस या फिंगरप्रिंट स्कैन करना अनिवार्य किया जा सकता है।


कैसे बचें UPI फ्रॉड से?

UPI पेमेंट करते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

✅ बैंक और UPI एप्स (Google Pay, PhonePe, Paytm) में SMS और ईमेल अलर्ट ऑन करें।
✅ किसी भी अनजान पेमेंट रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें।
✅ बैंक और UPI एप्स में जाकर अपनी ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करें।
✅ बिना वेरीफाई किए किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
✅ महीने में एक बार बैंक स्टेटमेंट और UPI ट्रांजैक्शन चेक करें।
✅ अगर कोई संदिग्ध कॉल आए तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।


निष्कर्ष

NPCI का यह प्रस्तावित बदलाव UPI को और अधिक सुरक्षित बना सकता है। हालांकि, इससे कुछ व्यापारियों को शुरुआत में दिक्कत हो सकती है, लेकिन ग्राहकों की सुरक्षा के लिए यह एक अहम कदम होगा। NPCI अभी इस पर बैंकों और अन्य हितधारकों से बातचीत कर रहा है, जिसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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