
— तराई क्रांति समाचार ब्यूरो
होली के दिन दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में लगी आग ने पूरे देश में सनसनी फैला दी। इस मामूली सी लगने वाली आग ने एक ऐसे राज से पर्दा उठा दिया, जिसने न्यायपालिका से लेकर संसद तक हड़कंप मचा दिया है। दमकल विभाग के कर्मी जब आग बुझाने के लिए पहुंचे, तो वहां उन्हें भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। इस खुलासे के बाद पुलिस और जांच एजेंसियां हरकत में आ गईं।
💰 जज के सरकारी आवास से करोड़ों की नकदी बरामद
सूत्रों के मुताबिक, आग बुझाने के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में नगदी मिली, जिसकी गिनती करने पर करोड़ों रुपये की रकम सामने आई। दिलचस्प बात यह रही कि जिस समय यह घटना घटी, उस दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा शहर में मौजूद नहीं थे। हालांकि, बरामद नकदी को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंच गया।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का बड़ा फैसला
जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम तक पहुंचा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना की अध्यक्षता में हुई बैठक में कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाईकोर्ट से फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करने का फैसला किया। हालांकि, कॉलेजियम के इस फैसले पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
❓ क्या जजों को भी आम आदमी जैसी सजा मिलेगी?
यह मामला अब तूल पकड़ चुका है और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। आम जनता पूछ रही है कि क्या इस मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ वैसी ही कार्रवाई होगी जैसी आम नागरिकों के खिलाफ होती है? क्या उन पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी या मामला सिर्फ ट्रांसफर तक सीमित रहेगा?
🔍 जांच एजेंसियों की नजर, आगे क्या होगा?
फिलहाल, इस मामले की जांच एजेंसियां कर रही हैं और इसकी गहराई से जांच की जा रही है कि यह नकदी कहां से आई और इसका स्रोत क्या है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार आगे क्या कदम उठाएंगे, इस पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है।