केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने दिया इस्तीफा, छोड़ी राज्यसभा सदस्यता

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने हाल ही में अपने मंत्री पद और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा है जिसमें उन्होंने अपने पदों से मुक्त किए जाने की अनुमति मांगी है। यह इस्तीफा केंद्र सरकार में उनके अनुभवों के बाद आया है।
डॉ. मुरुगन का अनुभव और जिम्मेदारियां
डॉ. मुरुगन ने प्रधानमंत्री के नाम अपने पत्र में अपने कार्यकाल के दौरान सूचना एवं प्रसारण, संसदीय कार्य, मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालयों में निभाई गई जिम्मेदारियों का जिक्र किया। उन्होंने उल्लेख किया कि इन विभागों में काम करने का अवसर मिलने से उन्हें देश और उसके लोगों को बेहतर समझने में मदद मिली। यही उनकी केंद्रीय मंत्री के रूप में सेवा का सार है।
पत्र में डॉ. मुरुगन ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार में काम करने के अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि तमिलनाडु में प्रधानमंत्री की हालिया यात्रा से उन्हें बहुत प्रेरणा मिली और लोगों के उत्साह को देखकर गर्व महसूस हुआ।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और राष्ट्रीय विचार
उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन की भी बात की जिसमें उन्होंने बताया कि वे किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे और पशुपालन से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने कभी सोचा नहीं था कि उनका बेटा केंद्र सरकार में सेवा करेगा। उनके इस संघर्ष और पृष्ठभूमि ने बीजेपी और ABVP में उनके तीन दशक के राजनीतिक सफर की नींव रखी।
डॉ. मुरुगन ने कहा कि महाकवि भारती, सरदार पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने ABVP ज्वाइन किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता हमेशा राष्ट्र रही, फिर पार्टी और अंत में स्वयं।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की नेता¬ृृत्व क्षमता की भी प्रशंसा की और कहा कि बीजेपी ने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को पहचान दिलाई। डॉ. मुरुगन ने कहा कि विभिन्न पदों पर काम करने का मौका मिलने से वे अब तक कई महत्वपूर्ण अनुभव हासिल कर पाए हैं।
डॉ. मुरुगन ने लिखा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कई विधानसभा और लोकसभा चुनाव भी लड़े। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारियां मिलने की कभी उम्मीद नहीं थी। हर जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के भरोसे और कड़ी मेहनत का नतीजा रही।
वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखते हैं कि तमिलनाडु में प्रधानमंत्री का समर्पण और जनता का प्यार उन्हें गर्व देता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे तमिलनाडु, बीजेपी और देश के लिए और अधिक काम करने के लिए प्रेरित हैं।
अंत में, डॉ. मुरुगन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री और राज्यसभा सदस्यता से मुक्त किया जाए, जिससे वे अपने निजी और पारिवारिक जीवन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उनका यह कदम राजनीति में एक नए अध्याय की ओर संकेत करता है।



