जमकर कर्ज लेने वाले 33 देशों का नया गठबंधन, पाकिस्तान बने अध्यक्ष

दुनिया के सबसे ज्यादा कर्जदार देशों ने एक नया मंच बनाया है, जिसका नेतृत्व पाकिस्तान को सौंपा गया है। इस गठबंधन में कुल 34 देश शामिल हैं और इसका मकसद विकासशील देशों के कर्ज से संबंधित मुद्दों पर साझा चर्चा करना है। यह मंच संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD के सहयोग से तैयार किया गया है।
गठबंधन की स्थापना और सदस्य देश
इस मंच की प्रक्रिया अप्रैल 2026 में शुरू हुई थी, तब मिस्र को इसके अंतरिम अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। बाद में सभी देशों की सहमति से पाकिस्तान को एक साल के लिए अध्यक्ष पद मिला है। इस संगठन में चारों महाद्वीपों के 34 देश शामिल हैं, जिनमें पाकिस्तान, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, फिजी, सीरिया, सूडान, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, सेंट लूसिया, सिएरा लियोन, नामिबिया और मॉरटिनिया प्रमुख हैं।
इसके अलावा मालदीव, मेडागास्कर, लेबनन, लेसेथो, केन्या, जॉर्डन, होंडारुस, गिनी, घाना, गैबॉन, इक्वाडोर और कांगो जैसे देश भी इस मंच के सदस्य हैं। बारबाडोस और भूटान जैसे छोटे देश भी इसमें जुड़े हैं, जो अपनी कर्ज संबंधी चुनौतियों को साझा करना चाहते हैं।
पाकिस्तान की अध्यक्षता और प्राथमिकताएं
थाइलैंड में हुई कर्जदार देशों की बैठक में पाकिस्तान को अध्यक्ष पद दिया गया। पाकिस्तान के वित्त मंत्री औरंगजेब ने कहा कि उनका उद्देश्य कर्ज मुक्ति की दिशा में काम करना है। उन्होंने ऋण प्रबंधन में सुधार, एक-दूसरे से सीखने और विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने के नए तरीकों पर जोर दिया।
वित्त मंत्री के अनुसार, पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज अप्रैल 2026 तक करीब 81.4 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये (293 अरब डॉलर) तक पहुंच चुका है, जिसमें घरेलू और विदेशी दोनों ऋण शामिल हैं।
UNCTAD की रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देशों को कर्ज पर ब्याज का भारी बोझ उठाना पड़ रहा है। 2025 में उन्होंने ब्याज के रूप में एक ट्रिलियन डॉलर चुकाए, जो 2010 की तुलना में तीन गुना अधिक है। सार्वजनिक ऋण की औसत ब्याज दर विकासशील देशों में 5.2% है जबकि विकसित देशों में यह 2.2% है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि 37 लाख लोग ऐसे देशों में रहते हैं जहां सार्वजनिक ऋण पर ब्याज का भुगतान स्वास्थ्य या शिक्षा के खर्च से भी अधिक है। यह स्थिति विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियों को दर्शाती है।
इस नए मंच के जरिए ये देश कर्ज प्रबंधन और वित्तीय स्थिरता के तरीकों पर विचार-विमर्श करेंगे ताकि वे बेहतर आर्थिक नीतियां अपना सकें और कर्ज भार को कम कर सकें।
यह गठबंधन विकासशील देशों को वैश्विक वित्तीय संरचनाओं में मजबूत आवाज देने की क्षमता भी प्रदान करेगा। पाकिस्तान की अध्यक्षता में यह पहल उनके व्यापक कर्ज सुधार कार्यक्रम का हिस्सा मानी जा रही है।


