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पत्नी-बच्चे या रिश्तेदार के नाम घर खरीदने से जुड़ी जरूरी क़ानूनी व टैक्स शर्तें

परिवार की संपत्ति को सुरक्षित रखने या टैक्स बचाने के लिए कई लोग अपनी पत्नी, बच्चों या रिश्तेदारों के नाम पर घर खरीदते हैं। लेकिन अगर घर का पैसा खरीदने वाला और नाम रजिस्ट्री में दर्ज व्यक्ति अलग हों तो यह मामला बेनामी कानून के दायरे में आ सकता है। इससे जुड़ी जांच और टैक्स नियमों को समझना जरूरी है।

सरकारी जांच कब होती है और क्यों?

संपत्ति खरीदते वक्त यह देखना जरूरी होता है कि पैसा किसका है और रजिस्ट्री किसके नाम की गई है। अगर रजिस्ट्री में नाम तो किसी रिश्तेदार का है लेकिन वह अपनी आय से संपत्ति का मूल्य पूरा नहीं जुटा सकता, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जांच कर सकती है। यह जांच टैक्स चोरी, असल मालिक छुपाने या बेनामी संपत्ति के शक पर शुरू होती है।

सिंगहानिया एंड कंपनी के पार्टनर तुषी कुमार के अनुसार, कोई रिश्तेदार के नाम पर घर खरीदना अपराध नहीं है, बशर्ते पैसे का स्रोत स्पष्ट और वैध हो। हालांकि अधारहीन सौदों में जांच और कानूनी कार्रवाई संभव है।

बॉम्बे हाई कोर्ट के वकील गौतम एस ठाकर भी कहते हैं कि रिश्ता होने से सभी सौदे बेनामी नहीं होते। नकद के बिना पारदर्शी भुगतान और रजिस्ट्री में सही नाम होने पर कानूनी जोखिम कम होता है। मगर दिखावे के नाम पर खरीदारी से खतरा बना रहता है।

रिश्तेदारों के नाम संपत्ति खरीदने के नियम और जोखिम

बेनामी संपत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम 1988 की धारा 2(9) में परिवार के कुछ रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति खरीदने की छूट दी गई है। इसके लिए जरूरी है कि घर खरीदने में लगे पैसे का स्रोत पूरी तरह वैध और स्पष्ट हो।

पत्नी और बच्चों के नाम पर खरीदी गई संपत्ति को सामान्यतः छूट मिलती है। अगर भाई-बहन या माता-पिता के साथ मिलकर संपत्ति खरीदी जाती है, तो सभी के नाम संयुक्त मालिक के तौर पर दर्ज होना चाहिए और पूरे भुगतान का स्रोत साफ होना आवश्यक है।

इसके अलावा टैक्स से जुड़े नियमों का पालन न करने पर भी नुकसान हो सकता है। यदि घर खरीदने के पैसे का स्रोत न बताए जाए तो इनकम टैक्स विभाग इसे अप्रकट आय मान कर टैक्स या जुर्माना लगा सकता है। बेनामी संपत्ति साबित होने पर सरकार संपत्ति जब्त कर सकती है और आपराधिक मामला भी बन सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पति-पत्नी के बीच संपत्ति पर क्लबह निकलता है। अगर पत्नी के नाम घर है लेकिन पैसा पति का था तो किराए की आय पति की टैक्सेबल आय में जोड़ दी जाती है। ऐसे नियमों की जानकारी रखना जरूरी है।

अगर घर किसी रिश्तेदार के नाम है तो सारे दस्तावेज जैसे सेल डीड, बैंक स्टेटमेंट, इनकम टैक्स रिटर्न, गिफ्ट डीड या लोन एग्रीमेंट अच्छे से सुरक्षित रखें। इससे भविष्य में कानूनी विवाद और जांच के खतरे कम होते हैं। हमेशा भुगतान बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए करें और रजिस्ट्री में स्वामी का नाम स्पष्ट होना चाहिए।

रिश्तेदार के नाम पर संपत्ति लेने से पारिवारिक व कानूनी विवाद भी हो सकते हैं। असली मालिकाना हक चुनाव, वसीयत, तलाक या बंटवारे में पेचीदगियां हो सकती हैं। इसलिए ऐसे सौदे करने से पहले अनुभवी वकील या टैक्स सलाहकार से जरूर सलाह लें। साफ-सुथरे रिकॉर्ड और फंड के स्रोत स्पष्ट होना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में चोरी, विवाद या जाच से बचा जा सके।

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