राहुल गांधी के आरोपों पर बोले पीयूष गोयल, कांग्रेस ने CEC को मंत्री-राज्यपाल बनाया

नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों का जवाब दिया है। गोयल ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश करती है। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी के रवैये को एक बचकाना दृष्टिकोण करार दिया।
कांग्रेस के शासनकाल और चुनाव आयोग
पीयूष गोयल ने बताया कि कांग्रेस को अपनी ही सरकार के दौरान चुनाव आयोग के संबंध में किए गए कामों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र की वर्तमान मोदी सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करने का अवसर दिया है। गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों को राजनीति में शामिल किए जाने के उदाहरण देकर कांग्रेस की इस बात की आलोचना की है कि वह चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है।
गोयल ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में कई मुख्य चुनाव आयुक्तों को बाद में मंत्री, सांसद और राज्यपाल जैसे राजनीतिक पद दिए गए। उन्होंने बताया कि इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। उनकी नज़र में यह कांग्रेस के अपने रिकॉर्ड से बचने की कोशिश है।
प्रमुख उदाहरण और सरकार का बचाव
गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और एमएस गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि शेषन को कांग्रेस ने 1999 में चुनाव लड़ाया था और एमएस गिल ने कांग्रेस की सदस्यता लेकर राज्यसभा पहुंचने के बाद मंत्री पद पाया। इससे कांग्रेस की चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर उठाई गई आलोचना संदिग्ध होती है।
इसके अलावा, गोयल ने टीकाराम मीणा और रतन यू. केलकर की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चुनाव अधिकारियों को बाद में कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक या प्रशासनिक पद दिए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गोयल ने 2023 के नए कानून का हवाला दिया जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में विपक्ष के नेता को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे नियुक्ति प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार आया है। यह दावा मोदी सरकार द्वारा चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को मजबूत करने का संकेत है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद पर गोयल ने कांग्रेस की असंगतियों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता स्वयं चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं की प्रशंसा करते हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व वोट चोरी जैसे आरोप लगाता है। उनका कहना है कि कांग्रेस के दावे राजनीतिक विरोधाभास दिखाते हैं और अंतिम निर्णय तथ्यों के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री की टिप्पणियां चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े बहस में नए आयाम जोड़ती हैं। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी राजनीतिक आरोप को ध्यान से जांचना चाहिए और बिना प्रमाण किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। यह विवाद चुनाव आयोग के कार्यों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर देशभर में चल रहे विमर्श को और मजबूत करता है।
गोयल की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर बनी बहस में राजनीतिक दृष्टिकोण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों अपनी-अपनी बात को मजबूती देने के लिए ऐतिहासिक और वर्तमान संदर्भ का प्रयोग कर रही हैं। भविष्य में इस विवाद से जुड़े मामलों पर विस्तृत चर्चा और विश्लेषण जारी रहने की संभावना है।



