एआई से ईवी तक: शहरी स्वच्छता में तकनीकी बदलाव

शहरी स्वच्छता के क्षेत्र में नई तकनीकों के प्रयोग से सुधार हो रहा है। भारत में स्वच्छता मिशन की शुरुआत 2014 में हुई, जो अब पारंपरिक तरीकों से डिजिटल, सेंसरयुक्त और इलेक्ट्रिफाइड प्रणाली तक पहुंच चुका है। इस बदलाव से साफ-सफाई कार्य अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और प्रभावी बन रहे हैं।
रायपुर में डिजिटल फेकल स्लज मैनेजमेंट
रायपुर नगर निगम ने मल-कीचड़ हटाने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर नागरिकों की सुविधा में सुधार किया है। अब लोग ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिससे नगर निगम कार्यालय पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ती। इस डिजिटल प्रणाली के जरिए सेवा की बुकिंग, भुगतान और ट्रैकिंग पूरी तरह ऑनलाइन होती है। यह प्रणाली MoHUA, NIUA और NUDM से जुड़ी है।
डैशबोर्ड प्रणाली रियल टाइम में सेवा की निगरानी करती है और सफाईकर्मियों के खतरनाक काम को यंत्रीकृत बनाने में मदद करती है। इसके तहत कार्य के पूरा होने पर ड्राइवर तसवीरें अपलोड करते हैं, जिससे सेवा का प्रमाणित रिकॉर्ड बनता है। इस प्रणाली ने कागजी प्रक्रिया को डिजिटल में बदल कर स्वच्छता कार्यों को पारदर्शी और सरल बनाया है।
तकनीकी नवाचार और इलेक्ट्रिक वाहन
तिरुवनंतपुरम के अमयिझांचन नहर की सफाई के लिए जी-स्पाइडर नामक एआई-संचालित रोबोट का इस्तेमाल किया गया है। यह रोबोट जल प्रवाह और कचरे की संरचना के अनुसार स्वयं को ढाल कर काम करता है, जिससे खतरनाक वातावरण में सफाईकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
इलेक्ट्रिक वाहन भी शहरी कचरा प्रबंधन में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहे हैं। आंध्र प्रदेश के गुंटूर, तमिलनाडु के चेन्नई और मध्य प्रदेश के इंदौर में हजारों इलेक्ट्रिक वाहन घर-घर कचरा संग्रहण के लिए तैनात किए गए हैं। इन वाहनों में GPS ट्रैकिंग होती है और ये प्रदूषण को कम करने में मदद करते हैं।
चेन्नई में इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा बेड़े से प्रतिदिन 41 टन कार्बन उत्सर्जन कम होता है, वहीं गुंटूर में डीजल की बचत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कमी आई है। इंदौर में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से करीब 25,000 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी के साथ ईंधन लागत में लाखों की बचत हो रही है।
इन शहरों में कचरा वाहनों के चार्जिंग के लिए सोलर पैनल आधारित स्टेशन भी स्थापित हो चुके हैं, जो हरित ऊर्जा का उत्पादन करते हैं और वाहनों को पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह पहल स्वच्छता को अधिक कुशल और सतत बनाती है।
शहरी स्वच्छता अब सिर्फ पारंपरिक झाड़ू और कूड़ेदान तक सीमित नहीं रही। तकनीक के समावेश से यह क्षेत्र नये युग में प्रवेश कर चुका है। डिजिटल डैशबोर्ड, एआई रोबोट और इलेक्ट्रिक वाहन मिलकर शहरों को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद कर रहे हैं।
जैसे-जैसे ये तकनीकी नवाचार और विस्तारित होंगे, युवा और नागरिक भी स्वच्छता में अधिक भागीदारी करेंगे। शहरी स्वच्छता की यह तकनीकी क्रांति भारत के स्वच्छता मिशन को मजबूती से आगे बढ़ा रही है। भविष्य में इन नवाचारों का व्यापक विस्तार शहरी सफाई प्रणालियों को और अधिक स्मार्ट, सक्षम और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी बनाएगा।